
भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के वीरभूम जिले में तारापीठ नामक एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं जो अपनी तांत्रिक क्रियाओं के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं। तारापीठ धाम को तांत्रिकों, शाक्तों, शैवों, अघोरी साधुओं और कापालिकसाधुओं का प्रिय स्थल माना जाता हैं। यहां पर आपको हजारों की संख्या में अघोरी साधु, जादू टोना और तंत्र क्रिया करने वाले तांत्रिक मिल जाएंगे। तारापीठ को 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता हैं। कहा जाता हैं की देवी सती के नेत्र भगवान विष्णु के सुदर्शन से कटकर इसी स्थान पर गिरे थे। इसलिए यह स्थान शक्तिपीठ बन गया।
यह स्थान तारा देवी साधना के लिए जगत प्रसिद्घ है यहां माता सती को तारा देवी के रूप में पूजा जाता हैं। मंदिर के पार्श्व में महाश्मशान हैं जहां पर अघोरी साधुओं और तांत्रिकों का डेरा लगा रहता हैं। यहां पर अघोरी कई प्रकार की साधनाएं करते हैं।
माना जाता है कि अघोरी साधु और तांत्रिक भूत-प्रेतों और पिशाचों को अपने वश में करने की समस्त क्रियाएं जानते हैं। क्योंकि वे प्रतिदिन रात को श्मशान की देवी की पूजा किया करते हैं।






Write a comment ...