
रत्नेश्वर महादेव मंदिर एक खूबसूरत ओर रहस्मयी मंदिर हैं धार्मिक नगरी काशी में मणिकर्णिका घाट पर स्थित है। इसे मातृऋण मंदिर के नाम से जाना जाता हैं। भगवान शिव को समर्पित ये एक मात्र ऐसा मंदिर हैं जो अपनी नींव से 9 डिग्री के एंगल पर झुका हुआ है। गुजराती शैली बने इस मंदिर की कूल ऊंचाई 13.14 मीटर हैं। सैकड़ो सालों से यह मंदिर इसी तरह पानी में तिरछा खड़ा है।
रत्नेश्वत महादेव मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और अलौकिक छवि के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।
मणिकर्णिका घाट पर कई प्राचीन मंदिर स्थित लेकिन उनमें से एक रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी हैं जो अपनी अलग पहचान के लिए जाना जाता हैं।
गंगा नदी के घाट पर बनाए गए सभी मंदिर घाट के के ऊपर बने हैं लेकिन रत्नेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण घाट के नीचे किया गया हैं। यही वजह की यह 8 महीनों तक पानी में डूबा रहता हैं।
बरसात के दिनों में जब गंगा नदी में बाढ़ आती हैं तो पानी मंदिर के शिखर तक पहुंच जाता हैं। पानी उतरने के बाद गर्भगृह में बालू ओर सिल्ट जमा हो जाती हैं। इस वजह से बाकी मंदिरो की तरह यहां प्रतिदिन पूजा नहीं होती। मंदिर के पुजारियों के अनुसार पानी उतरने के दो - तीन महीने बाद मंदिर में साफ सवाई करवाई जाती है उसके बाद ही मंदिर पूजा के लायक स्वछ हो पाता है।
ऐसा कहा जाता हैं मालवा प्रान्त की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी में कई मंदिरों और कुंडो का निर्माण करवाया था उनके शासनकाल में उनकी रत्नाबाई नाम की एक दासी ने मणिकर्णिका कुंड के सामने भगवान शिव का यह मंदिर बनवाया था।
प्रारम्भ में जब मंदिर बनाया गया था तब यह बाकी मंदिरों की तरह एक दम सीधा खड़ा था। बाद में समय के साथ यह मंदिर रहस्यमयी तरीके से तिरछा हो गया यही नहीं मंदिर के साथ ही पूरा का पूरा घाट भी झुक गया। कई बार घाट को फिर से बनाया गया लेकिन मंदिर को सीधा नहीं किया जा सका।
वैज्ञानिकों के अनुसार पानी के दबाव के कारण मंदिर के नीचे की जमीन खिसकने से यह मंदिर तिरछा हो गया। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि अगर जमीन खिसक गई तो फिर मंदिर गिरा क्यों नहीं सैकड़ो साल बीतने पर भी मंदिर की दीवारों में कोई भी दरार क्यों नहीं आई। अपने झुकाव के कारण यह मंदिर आज भी एक रहस्य बना हुआ है।
रत्नेश्वर महादेव मंदिर को लेकर लोगों में कई दंत कथाएं प्रचलित हैं। कई लोग इसे काशी करवट बताते हैं लेकिन काशी करवट का असली मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर के पास नेपाली खपड़ा इलाके में स्थित हैं।
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